ED क्या है? | ED Kya Hai | What is ED?

ED क्या है? ED Kya Hai What is ED? पुरी जानकारी

दोस्तों आज मैं (Gautam Prajapati) आप सभी को इस पोस्ट में आपको बताऊंगा की ED क्या है? (ED Full formEnforcement Directorate स्थापना कब हुआ था ED का पूरी जानकारी आपको आज यहा मिलेगी ।


  • ED क्या है?
  • ED (Enforcement Directorate) स्थापना कब हुआ था?
  • ED जांच क्या है?
  • ED (प्रवर्तन निदेशालय) प्रमुख कौन है?

ED (Enforcement Directorate) क्या है?


ED को हिंदी में एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ED Full form (Enforcement Directorate) होता है या फिर हम इसे (Directorate General of Economic Enforcement) मतलब की (प्रवर्तन निदेशालय) भी कहते है यह निदेशालय भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अंतर्गत एक विशेष तरीके की वित्तीय जांच एजेंसी होती है अगर साफ और आसान भाषा मे कहे तो इसके चंगुल में नेता, अभिनेता, और, भगौड़े पैसे वाले लोग जो इलीगल तरीके से पैसे रखे होते है वही इसके काबिल होते है।
जिसका वर्तमान में मुख्यालय नई दिल्ली में मौजूद है।

(Enforcement Directorate) यानी प्रवर्तन निदेशक, इसके प्रमुख अधिकारी होते है। प्रवर्तन निदेशालय, (ED) अधिकारियों का चयन आईएएस (IAS),आईपीएस (IPS), तथा (IRS) रैंक के अधिकारियों में से किया जाता है एक गुप्त प्रकार की एजेंसी होती है जिसका कार्य वित्तीय संबंधी अपराधों पर पूर्ण रूप से नजर रखना (Money Laundering), भारत में विदेशी संपत्ति तथा अन्य प्रकार के गैर संवैधानिक संपत्ति से संबंधित मामलों की पूरी सही तरीके से जांच करना जिस प्रकार आयकर विभाग काम करती है जो काफी लोकप्रिय संस्था भी है उसी प्रकार इस प्रवर्तन निदेशालय का काम होता है इसका मुख्य उद्देश्य होता है कि देश से भ्रष्टाचार को समाप्त किया जाए

ED (Enforcement Directorate) मुख्यालय कहा-कहा है?

ED प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) के पांच बड़े क्षेत्रीय कार्यालय भी मौजूद है इसका नाम है मुंबई, चेन्नई, चंडीगढ़, कोलकाता, और दिल्ली।
जिनके विशेष निदेशक प्रवर्तन प्रमुख हैं। निदेशालय में क्षेत्रीय कार्यालय अर्थात अहमदाबाद, बंगलौर, चंडीगढ़, चेन्नई, कोच्ची, दिल्ली, पणजी, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, जालंधर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, पटना तथा श्रीनगर हैं। जिनके प्रमुख संयुक्‍त निदेशक है। निदेशालय में उप क्षेत्रीय कार्यालय अर्थात भुवनेश्वर, कोझीकोड, इंदौर, मदुरै, नागपुर, इलाहाबाद, रायपुर, देहरादून, रांची, सूरत, शिमला हैं। जिनके प्रमुख उप निदेशक है।

ED (Enforcement Directorate) स्थापना कब हुआ था?

 ED = (Enforcement Directorate) मतलब की (प्रवर्तन निदेशालय) की स्थापना 1 मई साल 1956 को की गई थी जब विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम (Act), 1947 (फेरा,1947) को मद्दे नजर रखते हुए इस (Act,1947) के अंतर्गत विनियमन नियंत्रण विधियों के उल्लंघन को रोकने के लिए आर्थिक कार्य विभाग के नियंत्रण में एक प्रवर्तन इकाई, को गठित किया गया । फिर इस सेवा को संचालित करने के लिए एक मुखिया की जरूरत थी जिसको प्रवर्तक निदेशक के रूप में जाना जाता था जो इस नियम के मुखिया थे जिसको पूरी तरह से ठीक करने के लिए इस एजेंसी में भारतीय रिजर्व बैंक के तरफ से प्रतिनियुक्ति की जाती थी जिसमें एक बड़े अधिकारी के साथ साथ कुछ विशेष पुलिस स्थापना से 03 निरीक्षणओं की सहायता से कार्य किया जाता था।

(Economic Enforcement) प्रवर्तन निदेशालय, शुरुआती दौर में जब इसकी स्थापना हुई थी तब इसकी देश में सिर्फ दो शाखाएं थी मुंबई और कोलकाता में। उसके बाद जैसी जैसी जरूरत बढ़ती गई फिर 1957 इसमें कुछ संशोधन करने के बाद एक और शाखा का स्थापना किया गया जो मद्रास में खोला गया। और अब यह जरूरत यहीं नहीं रुकी इसके बाद इसमें फिर इसका संसोधन किया गया और वर्ष 1960 में इस निदेशालय का प्रशासनिक नियंत्रण और आर्थिक कार्य मंत्रालय से राजस्व विभाग में हस्तांतरित कर दिया गया था। 

और फिर जैसे जैसे समय बदलता गया वैसे वैसे इसकी जरूरत भी बढ़ती गई और फिर Act,फेरा, 1947 निरस्त हो गया और इसके स्थान पर एक्ट,फेरा-1973 आ गया। जिसको केवल 4 वर्षों के लिए यानी (1973 से 1977) तक इस निदेशालय को मंत्रिमंडल सचिवालय क्रमिक और प्रशासनिक सुधार विभाग के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में रखा गया और इस पर बहुत सारे काम हुए। 

फिर क्या इसमें आर्थिक उदारीकरण खूब चलता रहा फेरा,1973, जो कि नियमबद्ध कानून था। और इसे भी निरस्त कर दिया गया और (01 जून  2000) से इसके स्थान पर एक नई विधि विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम 1999 (फेमा) लागू की गई। फिर इस अधिनियम में एक नया मोड़ आया जिसको बाद में अंतरराष्ट्रीय (धन शोधन व्यवस्था) की अनुरूप एक नया कानून धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 (PMLA) बना और इस नियम का पालन करने के लिए ED यानी (Economic Enforcement) प्रवर्तन निदेशालय, 01 जुलाई 2005 को सौंपा गया।

ED (Economic Enforcement) प्रवर्तन निदेशालय, जांच क्या है?

ED (Economic Enforcement) प्रवर्तन निदेशालय, जांच एक सरकारी जांच एजेंसी है जो मनी लांड्रिंग और फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट जानी हेमा से जुड़े मामलों को देखती और उसको संतुलन बनाए रखती है भारत में आर्थिक कानूनों का पालन करवाना और आर्थिक अपराधी कम करना और उन अपराधियों से निपटने का काम करती है यह एजेंसी वित्त मंत्रालय के तहत काम करती है इसका इतिहास यानी कहे तो इसकी शुरुआत 1 मई 1956 से हुआ था जब पहली बार प्रवर्तन निदेशालय यूनिट का गठन किया गया उसके बाद 1957 में इस यूनिट का नाम बदलकर एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट कर दिया गया।

" हालांकि प्रवर्तन निदेशालय की जांच निम्नलिखित प्रकार की होती है जो मुख्य रूप से अलग-अलग काम करती है "

ED का काम क्या होता है?

  1. विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (फेमा)  यह एक बहुत ही विशेष रूप का नियम है यह अधिनियम 01/06/2000 में लागू किया गया था इसके प्रावधानों के उल्लंघन की जांच निपटान प्रवर्तन निदेशालय (Directorate of Settlement Enforcement) की जांच पड़ताल नामित प्राधिकारियों के द्वारा किया जाता है इसके अंतर्गत अर्ध न्यायिक जांच होती है. जिसमें यदि उल्लंघन सिद्ध होता है तो उस स्थिति में संबंधित व्यक्ति धर्म इकाई के ऊपर उस उल्लंघन के दौरान उससे तीन गुना राशि तक की आर्थिक दंड लगाया जा सकता है. 
  2. अगर हम इसको साफ साफ शब्दों में कहें तो यह एक सेटलमेंट का नियम होता है मतलब यदि आप इसमें दंडित पाए जाते हैं तो पैसे की लेनदेन करके मामले को सेटलमेंट किया जाता है लेकिन याद रहे यह सेटलमेंट जुर्म के 3 गुना राशि से अधिक होती है।
  3. " धन शोधन निवारण अधिनियम, जो पूर्णतया रूप से कई सारे संशोधनों के बाद सन 2002 पूर्ण रूप से लागू हुआ था । इस अधिनियम के अंतर्गत जांच की प्रक्रिया अन्य अपराधिक कानूनों की तरह की जाती है जांच के दौरान या उसके बाद यदि यह पाया जाता है कि उससे संबंधित व्यक्ति या इकाई ने जो भी संपत्ति एकत्र की है या जुटाई है या बनाई है वह पीएमएलए में सूचित यह दर्ज नहीं करवाई गई है तो " 28 कानूनों की धारा " 156, (Income Tax Section 156)मैं दंडित अपराधों के फल स्वरुप जितनी भी आए इकट्ठा की गई है तथा उसके बाद उसका शोधन यानी लॉन्ड्रिंग किया जा चुका है. 
  4. तो उस स्थिति में ऐसी संपत्ति को पूर्ण रूप से जब तक किया जा सकता है और अंत में उचित अपराधिक न्यायिक प्रक्रिया यानी मुकदमा पूर्ण होने पर ऐसी संपत्ति को कुर्क भी किया जाता है यानी सरकारी खाते में चला जाता है और वह संपत्ति उस व्यक्ति से पूरी तरह से छीन ली जाती है
  5. प्रवर्तन निदेशालय के अंतर्गत, उन मामलों में जिनमें फेरा 1973 के प्रावधानों के उल्लंघन से संबंधित कारण की वजह से नोटिस NCN 31/05/2002 तक जारी किए गए थे तो कुछ न्यायिक प्रक्रिया पूरा होने के बाद फिर निदेशालय के अधिकारी उचित निर्णय लेते हैं. 
  6. और यदि उल्लंघन सिद्ध हो जाता है कि आपने उस मामले में जुर्म किया है तब उचित जुर्माना लगाया जाता है इसी तरह के उन मामलों में जिनमें आपराधिक केस 31/05/2002 न्यायालय की डायरी में किया जाता है और न्यायालय के अधिकारी इस पर फैसला लेते हैं
ED (प्रवर्तन निदेशालय) प्रमुख कौन है?

संस्था जानकारी


मुख्यालय

नई दिल्ली, भारत

संस्था के कार्यपालक

संजय कुमार मिश्रा, आईआरएस, निदेशक सीमांचल दास, आईआरएस, विशेष निदेशक

मातृ संस्था

वित्त मंत्रालय, राजस्व विभाग


Ed full form in hindi 

ED को हिंदी में एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ED Full form (Enforcement Directorate) होता है या फिर हम इसे (Directorate General of Economic Enforcement) मतलब की (प्रवर्तन निदेशालय) भी कहते है


Enforcement directorate meaning in hindi

प्रवर्तन निदेशालय भी कहते है

Ed department

Governing body

Government of India

Parent agency

Department of Revenue, Ministry of Finance



FAQ’s (Frequently Asked Questions)

प्रश्न: ED का क्या काम होता है?
उत्तर: ED का मुख्य कार्य देश में वित्तीय संबंधी मामलों की जांच करना है। इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति विदेशी मुद्रा खरीदता है या विदेशी संपत्ति खरीदता है तो उसकी जांच करने का कार्य भी ED का होता है।

प्रश्न: ED का हिंदी क्या होता है?
उत्तर: ED को हिंदी में प्रवर्तन निदेशालय या आर्थिक प्रवर्तन महानिदेशालय कहते है।

प्रश्न: प्रवर्तन निदेशालय का मुखिया कौन है?
उत्तर: प्रवर्तन निदेशालय का मुखिया संजय कुमार मिश्रा, आईआरएस, निदेशक और सीमांचल दास, आईआरएस, विशेष निदेशक है।

प्रश्न: प्रवर्तन निदेशालय का गठन कब हुआ?
उत्तर: प्रवर्तन निदेशालय का गठन 1 मई 1956 में हुआ।

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